हिन्दी : डॉ.उमाशंकर चतुर्वेदी 'कंचन'
हिन्दी
गुरुवार, 5 अप्रैल 2012
जानती हिन्दी
जीवन में सबके ग्रह का
पड़ता है प्रभाव ये जानती हिन्दी
जीवन को सबके ही निखारता
है ये अभाव भी जानती हिन्दी
जो बढ़ता उसके प्रति लोग
रखे हैं कुभाव ये जानती हिन्दी
बिच्छू के डंक औ साधू के भाव
हैं
भिन्न स्वभाव ये जानती हिन्दी
बुधवार, 21 मार्च 2012
अंगड़ाई है हिन्दी
है रक्ताभ महावर भू पग
सूरज की अरुणाई है हिन्दी,
जो पथ से भटकी न कभी
वह भीषम की तरुणाई है हिन्दी,
पत्थर भी जहाँ मोम बने
करुणेश की वो करुणाई है हिन्दी,
अंग अनंग को देवे निमंत्रण
नारी की वो अंगड़ाई है हिन्दी,
मंगलवार, 20 मार्च 2012
विशिष्ट है हिन्दी ..
जो डर के न प्रयोग करें उनके
लिए रूप में क्लिष्ट है हिन्दी .
किन्तु सुपाच्य , सुबोध ,सुगम्य
स्वभाव में सुंदर शिष्ट है हिन्दी.
ताकत में कमजोर नहीं
अपना कर देखो बलिष्ट है हिन्दी .
ईश्वर की कुछ ऐसी कृपा कि
सभी से ये भिन्न विशिष्ट है हिन्दी
..
रविवार, 18 मार्च 2012
मेवाड़ है हिन्दी . .
साधु जरा भी न हों भयभीत
असाधु निमित्त तिहाड़ है हिन्दी.
भारत को घर मानिए आप
ये रक्षक रूप किवाड़ है हिन्दी .
जा भय ते सभी जंगली जीव
डरें वह शेर -दहाड़ है हिन्दी .
वीरता की यदि बात उठे उस
काल लगे ये मेवाड़ है हिन्दी . .
शनिवार, 17 मार्च 2012
रानी है हिन्दी..
लेती परीक्षा कठोर है किन्तु
ये नन्दिनी सी वरदानी है हिन्दी.
जो समझे उसके लिए आग है,
आग लिए पर पानी है हिन्दी.
है करती न दिखावा जरा,
अभिमानी नहीं स्वाभिमानी है हिन्दी.
लाल को काल के गाल में डाल दे,
सिंहिनी झाँसी की रानी है हिन्दी..
बुधवार, 14 मार्च 2012
कछार है हिन्दी
होते खड़ी हिमवान लगे
झुकने पर विन्ध्य पहार है हिन्दी .
पालकी, नालकी ,डोली लगे
लगती है कभी ये कँहार है हिन्दी
जो नित रूप नया दिखलाये
वो पौध है बाग़ बहार है हिन्दी
कान्हा की काली लगे कमरी
कभी कूर्म,कलिन्द,कछार है हिन्दी
बुधवार, 18 जनवरी 2012
चितचोर है हिन्दी
आनन
को
अतिरंजित
जो
करती
वह
आँख
की
कोर
है
हिन्दी
।
दूर
हो
दो
दिल
पास
लगे
,
वह
नेह
है
,
नेह
की
डोर
है
हिन्दी
।
जो
अनजाने
में
चित्त
चुराये
बेहाल
करे
चित
चोर
है
हिन्दी
।
स्वर्ग
से
श्रेष्ठ
अमूल्य
लगे
वह
भारत
भूमि
है
,
भोर
है
हिन्दी
।
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