शुक्रवार, 28 जनवरी 2011


सारथी कृष्ण बने महाभारत

युद्ध में है यह स्यंदन हिन्दी ।

भाग सके न कहीं मन मादक

प्रीत का है यह बंधन हिन्दी ।

लाख भुजंग लपेटे हों शीतल

गंध न छाडे है चन्दन हिन्दी ।

हैं वन बाग अनेक परन्तु

जिसे कहते वह नंदन हिन्दी ।।

जो इसे दूर से देख रहे

उनको भले ही तरसा रही हिन्दी ।

है इतनी ये उदार की प्यार से

प्रेम - सुधा बरसा रही हिन्दी ।

नित्य नया - नया रूप लगे

रमणीयता को दरसा रही हिन्दी ।

हारी नहीं कभी शत्रुओं से

हिय खोल सदा हरषा रही हिन्दी ।

गुरुवार, 27 जनवरी 2011


हिन्दी की ये प्रियता लखिए

रसखान रहीम ने भाखी है हिन्दी ।

स्वाद वही बतला सकता जिसने

रस तेरो ये चाखी है हिन्दी ।

लाज रखे बहिनी की सदा

उस भाई के हाथ की राखी है हिन्दी ।

जीवन में जो उजाला भरे

कबिरा की रमैनी है साखी है हिन्दी ॥

मंगलवार, 25 जनवरी 2011


पावन रूप सुरूप लिए ,

लिए ग्रन्थ अनेक पुनीता है हिन्दी ।

नीति अनीति दिखाती हुई

भगवान के श्रीमुख गीता है हिन्दी ।

जो सुख सेज न जानी कभी

वह ही सिरीराम की सीता है हिन्दी ।

यज्ञ है यज्ञ की वेदी , स्रुवा स्रुचि

प्रोक्षनी और प्रणीता है हिन्दी ॥

शुक्रवार, 21 जनवरी 2011


शक्ति प्रवाहित है करती

हरती तम को वह तार है हिन्दी ।

जो हिम से चली सागर लों

नहीं टूटी कभी वह धार है हिन्दी ॥

भारत माँ के गले में सुशोभित

हो रहा जो वह हार है हिन्दी ॥

जीवन जीवन सा लगता नहीं

जाके विना वह सार है हिन्दी ॥

सातों है रंग भरा हुआ इन्द्र का

ईश्वर की यह इच्छा है हिन्दी

भोले के भाल पे राजत हाथ के

खप्पर में यह भिक्षा है हिन्दी ।

है गुरुता गुरु द्रोण लिए

एकलव्य की निष्ठित शिक्षा है हिन्दी ।

सीता सी है निर्दोष परन्तु

ये सीता की अग्नि परीक्षा है हिन्दी ॥

बुधवार, 19 जनवरी 2011


भारत का जो निवासी बने

उसके लिए भाई का भात है हिन्दी ।

जो दुःख दर्द में आके खड़ा

दिन रात रहे वह नात है हिन्दी ।

जो सदा विष्णु के ऊपर राजे

वही तुलसी दल पात है हिन्दी ।

जो तम भेद प्रकाश का पुंज दे

वो सुखदायी प्रभात है हिन्दी ।

दुःख इसे इस बात का है

अपने ही जनों से ये हारी है हिन्दी ।

कोमल है कश्मीर की वादी में

केशर की यह क्यारी है हिन्दी ।

निर्मल नारी स्वभाव लिए

नमिता से भरी यह नारी है हिन्दी ।

पिंगलशास्त्र, पुराण की पंक्ति है

वेद ऋचा सी ये प्यारी है हिन्दी ।

शनिवार, 15 जनवरी 2011


धारी हुई गुण रूप अपार है

शास्त्रीय नायिका धीरा है हिन्दी ।

भारत माँ की अनामिका की

मुंदरी में जड़ी यह हीरा है हिन्दी ।

साहस धैर्य समेटे हुए यह

आयुषी है बलबीरा है हिन्दी ।

राधा कभी अनुराधा कभी

कभी कृष्ण दिवानी ये मीरा है हिन्दी ॥

गुरुवार, 13 जनवरी 2011


लोक का जो उपकार करे

वह नारद वीणा की तान है हिन्दी ।

जो कभी सूखे विराम न ले

वह ही सुरधेनु की थान है हिन्दी ।

जो निज देश से प्यार करे

उसके लिए देश की मान है हिन्दी ।

योगी यती जो समाधि लगाये हुए

बइठे वह ध्यान है हिन्दी ।

गुरुवार, 6 जनवरी 2011


आत्मबली मरते न कभी इस

कारण आज लौ जिन्दी है हिन्दी ।

डोंगरी औ' बंगला, उड़िया औ'

नेपाली, मराठी, औ' सिन्धी है हिन्दी ।

कालिय नाग जहाँ हुआ मर्दित

पावन नीर कलिन्दी है हिन्दी ।

भारत माता इसे नित साजत

भाल पे राजत बिन्दी है हिन्दी ।