शनिवार, 26 फ़रवरी 2011


सिर्फ पुकार के देखो इसे

अपनी है अनाथ की नाथ है हिन्दी ।

कर्म ही पूजा है पाठ पढ़ाती ये

कर्मठ के लिए हाथ है हिन्दी ।

अंग इसे नहीं छांट सकोगे ये

आँख है , नाक है , माथ है हिन्दी ।

हिन्दी वगैर अधूरा सभी कुछ

जीवन मृत्यु के साथ है हिन्दी ॥

1 टिप्पणी:

  1. हिन्दी वगैर अधूरा सभी कुछ
    जीवन मृत्यु के साथ है हिन्दी ॥

    -मातृभाषा से ही सब कुछ है.

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