शुक्रवार, 25 फ़रवरी 2011


नाचे लाला छछिया भर छाछ पे

ये उस छाछ की राज है हिन्दी ।

सारा जहान अचम्भित होके

विलोके जिसे वह ताज है हिन्दी ।

काव्य कला कमनीय कलेवर

धारे हुए अभिराज है हिन्दी ।

भूत भविष्य समेटे हुए जो

नवीन दिखे वह आज है हिन्दी ॥

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