गुरुवार, 27 जनवरी 2011


हिन्दी की ये प्रियता लखिए

रसखान रहीम ने भाखी है हिन्दी ।

स्वाद वही बतला सकता जिसने

रस तेरो ये चाखी है हिन्दी ।

लाज रखे बहिनी की सदा

उस भाई के हाथ की राखी है हिन्दी ।

जीवन में जो उजाला भरे

कबिरा की रमैनी है साखी है हिन्दी ॥

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