सोमवार, 27 दिसंबर 2010


भाल पे शोभित है निज देश के

प्यारी धरा कश्मीर है हिन्दी ।

सीता के राम औ' राधा के श्याम

तो प्यार में राँझा की हीर है हिन्दी ।

खींच के हार गया दुश्शासन

द्रोपदी की वह चीर है हिन्दी ।

गर्व की बात है साँच कहूँ

इस ' कंचन ' की तकदीर है हिन्दी ।

1 टिप्पणी:

  1. गर्व की बात है साँच कहूँ
    आपका हिंदी प्रेम बहुत प्रशंसनीय है . .

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