हिन्दी की ये प्रियता लखिए
रसखान रहीम ने भाखी है हिन्दी ।
स्वाद वही बतला सकता जिसने
रस तेरो ये चाखी है हिन्दी ।
लाज रखे बहिनी की सदा
उस भाई के हाथ की राखी है हिन्दी ।
जीवन में जो उजाला भरे
कबिरा की रमैनी है साखी है हिन्दी ॥
हिन्दी की ये प्रियता लखिए
रसखान रहीम ने भाखी है हिन्दी ।
स्वाद वही बतला सकता जिसने
रस तेरो ये चाखी है हिन्दी ।
लाज रखे बहिनी की सदा
उस भाई के हाथ की राखी है हिन्दी ।
जीवन में जो उजाला भरे
कबिरा की रमैनी है साखी है हिन्दी ॥
पावन रूप सुरूप लिए ,
लिए ग्रन्थ अनेक पुनीता है हिन्दी ।
नीति अनीति दिखाती हुई
भगवान के श्रीमुख गीता है हिन्दी ।
जो सुख सेज न जानी कभी
वह ही सिरीराम की सीता है हिन्दी ।
यज्ञ है यज्ञ की वेदी , स्रुवा स्रुचि
प्रोक्षनी और प्रणीता है हिन्दी ॥
शक्ति प्रवाहित है करती
हरती तम को वह तार है हिन्दी ।
जो हिम से चली सागर लों
नहीं टूटी कभी वह धार है हिन्दी ॥
भारत माँ के गले में सुशोभित
हो रहा जो वह हार है हिन्दी ॥
जीवन जीवन सा लगता नहीं
जाके विना वह सार है हिन्दी ॥
सातों है रंग भरा हुआ इन्द्र का
ईश्वर की यह इच्छा है हिन्दी ।
भोले के भाल पे राजत हाथ के
खप्पर में यह भिक्षा है हिन्दी ।
है गुरुता गुरु द्रोण लिए
एकलव्य की निष्ठित शिक्षा है हिन्दी ।
सीता सी है निर्दोष परन्तु
ये सीता की अग्नि परीक्षा है हिन्दी ॥
भारत का जो निवासी बने
उसके लिए भाई का भात है हिन्दी ।
जो दुःख दर्द में आके खड़ा
दिन रात रहे वह नात है हिन्दी ।
जो सदा विष्णु के ऊपर राजे
वही तुलसी दल पात है हिन्दी ।
जो तम भेद प्रकाश का पुंज दे
वो सुखदायी प्रभात है हिन्दी ।
दुःख इसे इस बात का है
अपने ही जनों से ये हारी है हिन्दी ।
कोमल है कश्मीर की वादी में
केशर की यह क्यारी है हिन्दी ।
निर्मल नारी स्वभाव लिए
नमिता से भरी यह नारी है हिन्दी ।
पिंगलशास्त्र, पुराण की पंक्ति है
वेद ऋचा सी ये प्यारी है हिन्दी ।
धारी हुई गुण रूप अपार है
शास्त्रीय नायिका धीरा है हिन्दी ।
भारत माँ की अनामिका की
मुंदरी में जड़ी यह हीरा है हिन्दी ।
साहस धैर्य समेटे हुए यह
आयुषी है बलबीरा है हिन्दी ।
राधा कभी अनुराधा कभी
कभी कृष्ण दिवानी ये मीरा है हिन्दी ॥
लोक का जो उपकार करे
वह नारद वीणा की तान है हिन्दी ।
जो कभी सूखे विराम न ले
वह ही सुरधेनु की थान है हिन्दी ।
जो निज देश से प्यार करे
उसके लिए देश की मान है हिन्दी ।
योगी यती जो समाधि लगाये हुए
बइठे वह ध्यान है हिन्दी ।
आत्मबली मरते न कभी इस
कारण आज लौ जिन्दी है हिन्दी ।
डोंगरी औ' बंगला, उड़िया औ'
नेपाली, मराठी, औ' सिन्धी है हिन्दी ।
कालिय नाग जहाँ हुआ मर्दित
पावन नीर कलिन्दी है हिन्दी ।
भारत माता इसे नित साजत
भाल पे राजत बिन्दी है हिन्दी ।